ख्वाब आँखों में जितने पाले थे-अभिषेक कुमार अम्बर-Abhishek Kumar Amber-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita,

ख्वाब आँखों में जितने पाले थे-अभिषेक कुमार अम्बर-Abhishek Kumar Amber-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita,

ख्वाब आँखों में जितने पाले थे,
टूट कर के बिखर ने वाले थे।
जिनको हमने था पाक दिल समझा,
उन्हीं लोगों के कर्म काले थे।
पेड़ होंगे जवां तो देंगे फल,
सोच कर के यही तो पाले थे।
सबने भर पेट खा लिया खाना,
माँ की थाली में कुछ निवाले थे।
आज सब चिट्ठियां जला दी वो,
जिनमें यादें तेरी संभाले थे।
हाल दिल का सुना नही पाये,
मुँह पे मजबूरियों के ताले थे।

Leave a Reply