खून का आंसू-शहीद भगत सिंह-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem|Kavita Shaheed Bhagat Singh 

खून का आंसू-शहीद भगत सिंह-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem|Kavita Shaheed Bhagat Singh

सुखदेव, भगत सिंह, राजगुरु, आजादी के दीवाने थे,
हंस-हंस के झूले फांसी पर भारत मां के मस्ताने थे ।

वह मेरे नहीं हैं जिन्दा हैं, वह अमर शहीद कहाएंगे,
वह प्यारे वतन पै निसार हुए, वह वीरों में मरदाने थे ।

यह मरजी उस मालिक की थी, सब उसने खेल दिखाए हैं,
था लिखा उन्हें कुर्बान होना, फांसी के मुफ्त बहाने थे ।

ब्रिटिश ने कहा माफी मांगो, शायद जिंदगानी हो जाए,
हंस हंस के सब ने जवाब दिया, नहीं हशर में दाग लगाने थे ।

दुख दर्द से तूने पाला था, कुछ काम ना हम आए तेरे,
आजाद ना मां कर तुम को चले, मालिक के यई मनमाने थे ।

सुखदेव, भगत सिंह, राजगुरु, आजादी के दीवाने थे
हंस-हंस के झूले फांसी पर भारत मां के मस्ताने थे ।

(-कमल)

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