खुश आमदेद-रात पश्मीने की-गुलज़ार-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gulzar 

खुश आमदेद-रात पश्मीने की-गुलज़ार-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gulzar

और अचानक —
तेज हवा के झोंके ने कमरे में आ कर हलचल कर दी —
परदे ने लहरा के मेज़ पे रखी ढेर सी कांच की चीज़ें उलटी कर दीं–
फड फड करके एक किताब ने जल्दी से मुंह ढांप लिया —
एक दवात ने गोता खाके सामने रखे जितने भी कोरे कागज़ थे सबको रंग डाला —
दीवारों पे लटकी तस्वीरों ने भी हैरत से गर्दन तिरछी कर के देखा तुमको !
फिर से आना ऐसे ही तुम
और भर जाना कमरे में!

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