खुशबू बनके-कविता-प्रफुल्ल सिंह “बेचैन कलम” -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Praful Singh “Bechain Kalam”

खुशबू बनके-कविता-प्रफुल्ल सिंह “बेचैन कलम” -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Praful Singh “Bechain Kalam”

 

सुनो,
तुम जानते हो ना
मेरा मन भटकता रहता है
हाँ अभी मेरे मन में
एक गहरा विचार समाया है
अगर चला जाऊँ तुमसे पहले
तो एक काम तुम मेरा करना
मेरी अस्थियों का विसर्जन
गंगा में मत करना
मेरा पिंड दान भी मत करवाना
बस उन अस्थियों को
थोड़ा संभालना
और अपने आस पास कहीं
एक छोटा सा पौधा लगा देना
और उसकी खाद में मिला देना
उन अस्थियों को
खयाल रखना उस पौधे का
बस इसी तरह जाने के बाद भी
हमेशा रहूँगा तुम्हारे
एक दम करीब
खुशबू बनके..!!

 

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