खुले आसमाँ में आजादी के पंख-प्रशांत पारस-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Prashant Paras

खुले आसमाँ में आजादी के पंख-प्रशांत पारस-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Prashant Paras

खुले आसमाँ में आजादी के पंख,
फरफरा लेने दे मुझको,

कठपुतली बने महीनो बीत गये,
अब तो आकाश का साफा बांध, उड़ लेने दे मुझको
खुले आसमाँ में आजादी के पंख फरफरा लेने दे मुझको,
पेड़ों के झुनझुने, सुन लेने दे मुझको,
साहस की हरेक अरदिल, जीत लेने दे मुझको,
छितिज का मिलन, देख लेने दे मुझको,
खुले आसमाँ में आजादी के पंख,
फरफरा लेने दे मुझको,

कुछ हरी, कुछ पिली, कुछ नीली,
वो देखो उड़ रही एक और उजली,
उनके बीच जाकर, दोस्ती का संबंध,
बढ़ा लेने दे मुझको
खुले आसमाँ में आजादी के पंख,
फरफरा लेने दे मुझको
कभी दांये, कभी बांये, उड़ लेने दे, मस्त गगन में मुझको,
खुले आसमाँ में आजादी के पंख,
फरफरा लेने दे मुझको

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