खुली हवा में रखा हुआ पेट्रोल-अमिताभ भट्ट अरविन्द-Amitabh Bhatt Arvind-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita,

खुली हवा में रखा हुआ पेट्रोल-अमिताभ भट्ट अरविन्द-Amitabh Bhatt Arvind-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita,

खुली हवा में रखा हुआ पेट्रोल
जैसे उड़ने के बाद भी
छोड़ जाता है अपनी खुशबू
दिलाता है याद अपने होने की
वैसे ही
तुम भी छोड़ जाना
अपना एक हिस्सा मेरे भीतर
पिघलाना मुझे अंदर से
निकलकर बाहर आना
आँसुओं के साथ
दिलाना याद अपने होने की
छोड़ जाना अपनी खुशबू
अखबार के पन्नों में
सुबह की चाय में
घर की दीवारों में
और मुझमें

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