खुरासान खसमाना कीआ हिंदुसतानु डराइआ-शब्द -गुरु नानक देव जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Nanak Dev Ji

खुरासान खसमाना कीआ हिंदुसतानु डराइआ-शब्द -गुरु नानक देव जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Nanak Dev Ji

खुरासान खसमाना कीआ हिंदुसतानु डराइआ ॥
आपै दोसु न देई करता जमु करि मुगलु चड़ाइआ ॥
एती मार पई करलाणे तैं की दरदु न आइआ ॥१॥
करता तूं सभना का सोई ॥
जे सकता सकते कउ मारे ता मनि रोसु न होई ॥१॥ रहाउ ॥
सकता सीहु मारे पै वगै खसमै सा पुरसाई ॥
रतन विगाड़ि विगोए कुतीं मुइआ सार न काई ॥
आपे जोड़ि विछोड़े आपे वेखु तेरी वडिआई ॥२॥
जे को नाउ धराए वडा साद करे मनि भाणे ॥
खसमै नदरी कीड़ा आवै जेते चुगै दाणे ॥
मरि मरि जीवै ता किछु पाए नानक नामु वखाणे ॥३॥५॥३९॥(360)॥

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