खींच लूं पैर कि मींज लू आंखें-कविता-करन कोविंद -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Karan Kovind

खींच लूं पैर कि मींज लू आंखें-कविता-करन कोविंद -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Karan Kovind

खींच लू पैर की
मींज लू आंखे

पथ एक न प्रदर्शक फिर भी मै चलता
शसय – भय अडचन से एक न मुडता
मै आकेला ही चलूगा मुझे जरूरत नही
उनकी जो सिर्फ मजा लेते है
उनका जो स्नेह के केवल सांचे
खींच लू पैर कि
मींज लू आंखे

कोलाहल मे बंदसी लूटते है
अइतारता मे संत्वित करते है
अरे तुम मिथ्या प्रेम मिथ्या लगाव
नही चाहिए तुम्हारे जैसा प्रदर्शक
जो अन्दर से कठोर बाहर से कांचे
खींच लू पैर कि
मींज लू आंखे

Leave a Reply