ख़ूब रोका शिकायतों से मुझे-ज़ौक़ -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Zauq 

ख़ूब रोका शिकायतों से मुझे-ज़ौक़ -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Zauq

ख़ूब रोका शिकायतों से मुझे
तू ने मारा इनायतों से मुझे

वाजिब-उल-क़त्ल उस ने ठहराया
आयतों से रिवायतों से मुझे

कहते क्या क्या हैं देख तो अग़्यार
यार तेरी हिमायतों से मुझे

क्या ग़ज़ब है कि दोस्त तू समझे
दुश्मनों की रिआयतों से मुझे

दम-ए-गिर्या कमी न कर ऐ चश्म
शौक़ कम है किफ़ायतों से मुझे

कमी-ए-गिर्या ने जला मारा
हुआ नुक़साँ किफ़ायतों से मुझे

ले गई इश्क़ की हिदायत ‘ज़ौक़’
उन कने सब निहायतों से मुझे

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