ख़ून थूकेगी ज़िंदगी कब तक-गुमाँ-ग़ज़लें-जौन एलिया -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Jaun Elia

ख़ून थूकेगी ज़िंदगी कब तक-गुमाँ-ग़ज़लें-जौन एलिया -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Jaun Elia

ख़ून थूकेगी ज़िंदगी कब तक
याद आएगी अब तिरी कब तक

जाने वालों से पूछना ये सबा
रहे आबाद दिल-गली कब तक

हो कभी तो शराब-ए-वस्ल नसीब
पिए जाऊँ मैं ख़ून ही कब तक

दिल ने जो उम्र-भर कमाई है
वो दुखन दिल से जाएगी कब तक

जिस में था सोज़-ए-आरज़ू उस का
शब-ए-ग़म वो हवा चली कब तक

बनी-आदम की ज़िंदगी है अज़ाब
ये ख़ुदा को रुलाएगी कब तक

हादिसा ज़िंदगी है आदम की
साथ देगी भला ख़ुशी कब तक

है जहन्नुम जो याद अब उस की
वो बहिश्त-ए-वजूद थी कब तक

वो सबा उस के बिन जो आई थी
वो उसे पूछती रही कब तक

मीर-‘जौनी’ ज़रा बताएँ तो
ख़ुद में ठहरेंगे आप ही कब तक

हाल-ए-सहन-ए-वजूद ठहरेगा
तेरा हंगाम-ए-रुख़्सती कब तक

This Post Has One Comment

Leave a Reply