ख़ुदग़रज़-दर्द आशोब -अहमद फ़राज़-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Ahmed Faraz,

ख़ुदग़रज़-दर्द आशोब -अहमद फ़राज़-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Ahmed Faraz,

ऐ दिल ! अपने दर्द के कारन तू क्या-क्या बेताब रहा
दिन के हंगामों में डूबा रातों को बेख़्वाब रहा
लेकिन तेरे ज़ख़्म का मरहम तेरे लिए नायाब हा

फिर इक अनजानी सूरत ने तेरे दुख के गीत सुने
अपनी सुन्दरता की की किरनों से चाहत के ख़्वाब बुने
ख़ुद काँटॊं की बाढ़ से गुज़री तेरी राहों में फूल चुने

ऐ दिल जिसने तेरी महरूमी के दाग़ को धोया था
आज उसकी आँखें पुरनम थीं और तू सोच में खोया थ
देख पराए दुख की ख़ातिर तू भी कभी यूँ रोया था ?

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