ख़ुदकुशी-दर्द आशोब -अहमद फ़राज़-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Ahmed Faraz,

ख़ुदकुशी-दर्द आशोब -अहमद फ़राज़-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Ahmed Faraz,

वो पैमान भी टूटे जिनको
हम समझे थे पाइंदा
वो शम्एं भी दाग हैं जिनको
बरसों रक्खा ताबिंदा
दोनों वफ़ा करके नाख़ुश हैं
दोनों किए पर शर्मिन्दा
प्यार से प्यारा जीवन प्यारे
क्या माज़ी क्या आइंदा
हम दोनों अपने क़ातिल हैं
हम दोनों अब तक ज़िन्दा

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