ख़िज़ाँ जब तक चली जाती नहीं है-ग़ज़लें -बिस्मिल अज़ीमाबादी-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Bismil Azimabadi

ख़िज़ाँ जब तक चली जाती नहीं है-ग़ज़लें -बिस्मिल अज़ीमाबादी-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Bismil Azimabadi

ख़िज़ाँ जब तक चली जाती नहीं है
चमन वालों को नींद आती नहीं है

जफ़ा जब तक कि चौंकाती नहीं है
मोहब्बत होश में आती नहीं है

जो रोता हूँ तो हँसता है ज़माना
जो सोता हूँ तो नींद आती नहीं है

तुम्हारी याद को अल्लाह रक्खे
जब आती है तो फिर जाती नहीं है

कली बुलबुल से शोख़ी कर रही है
ज़रा फूलों से शरमाती नहीं है

जहाँ मय-कश भी जाएँ डरते डरते
वहाँ वाइज़ को शर्म आती नहीं है

नहीं मिलती तो हंगामे हैं क्या क्या
जो मिलती है तो पी जाती नहीं है

जवानी की कहानी दावर-ए-हश्र
सर-ए-महफ़िल कही जाती नहीं है

कहाँ तक शैख़ को समझाइएगा
बुरी आदत कभी जाती नहीं है

घड़ी भर को जो बहलाए मिरा दिल
कोई ऐसी घड़ी आती नहीं है

हँसी ‘बिस्मिल’ की हालत पर किसी को
कभी आती थी अब आती नहीं है

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