खबर है-रात पश्मीने की-गुलज़ार-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gulzar 

खबर है-रात पश्मीने की-गुलज़ार-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gulzar

निज़ामे-जहाँ,पढ़ के देखो तो कुछ इस तरह
चल रहा है!
इराक़ और अमरीका की जंग छिड़ने के इमकान
फिर बढ़ गए हैं।
अलिफ़ लैला की दास्ताँ वाला वो शहरे-बग़दाद
बिल्कुल तबाह हो चुका है।
ख़बर है किसी शख्स ने गंजे सर पर भी अब
बाल उगने की एक ‘पेस्ट’ईज़ाद की है!
कपिलदेव ने चार सौ विकेटों का अपना
रिकार्ड कायम किया है।
ख़बर है कि डायना और चार्ल्स अब,क्रिसमस
से पहले अलग हो रहे हैं।
किरोशा और सिलवानिया भी अलग होने ही
के लिए लड़ रहे हैं।
प्लास्टिक पे दस फ़ीसदी टैक्स फिर बढ़ गया है।

ये पहली नवम्बर की खबरें है सारी,–
निज़ामे जहाँ इस तरह चल रहा है!

मगर ये ख़बर तो कहीं भी नहीं है ,
कि तुम मुझसे नाराज़ बैठी हुई हो–
निज़ामे-जहाँ किस तरह चल रहा है?

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