खगपति प्रबल पराक्रमी परमहंस-कबित्त-भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji

खगपति प्रबल पराक्रमी परमहंस-कबित्त-भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji

खगपति प्रबल पराक्रमी परमहंस
चातुर चतुर मुख चंचल चपल है ।
भुजबली असट भुजा ताके चालीस कर
एक सउ अर साठि पाउ चाल चला चल है ।
जाग्रत सुपन अहनिसि दहदिस धावै
त्रिभवन प्रति होइ आवै एक पल है ।
पिंजरी मै अछत उडत पहुचै न कोऊ
पुर पुर पूर गिर तर थल जल है ॥२३०॥

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