क्यों मन आज उदास है-बादर बरस गयो-गोपालदास नीरज-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gopal Das Neeraj

क्यों मन आज उदास है-बादर बरस गयो-गोपालदास नीरज-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gopal Das Neeraj

आज न कोई दूर न कोई पास है
फिर भी जाने क्यों मन आज उदास है?

आज न सूनापन भी मुझसे बोलता
पात न पीपल पर भी कोई डोलता
ठिठकी सी है वायु, थका-सा नीर है
सहमी-२ रात, चाँद गम्भीर है
गुपचुप धरती, गुमसुम सब आकाश है।
फिर भी जाने क्यों मन आज उदास है?

आज शाम को झरी नहीं कोई कली
आज अँधेरी नहीं रही कोई गली
आज न कोई पंथी भटका राह में
जला पपीहा आज न प्रिय की चाह में
आज नहीं पतझार, नहीं मधुमास है।
फिर भी जाने क्यों मन आज उदास है?

आज अधूरा गीत न कोई रह गया
चुभने वाली बात न कोई कह गया
मिलकर कोई मीत आज छूटा नहीं
जुड़कर कोई स्वप्न आज टूटा नहीं
आज न कोई दर्द न कोई प्यास है।
फिर भी जाने क्यों मन आज उदास है?

आज घुमड़कर बादल छाया है कहीं
बिना बुलाए सावन आया है कहीं
किसी अधजले विकल शलभ की याद में
आज किसी ने दीप जलाया है कहीं
इसीलिए शायद मन आज उदास है।
फिर भी जाने क्यों मन आज उदास है?

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