क्या हुआ जो साथ छूटा?-लहर पुकारे -गोपालदास नीरज-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gopal Das Neeraj

क्या हुआ जो साथ छूटा?-लहर पुकारे -गोपालदास नीरज-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gopal Das Neeraj

क्या हुआ जो साथ छूटा?
साथ मग तो शेष है!

श्वास की चलती हवा में,
दो अमर सुख-दुख-विहंगम,
उड़ चले थे विश्व-नभ पर,
खोजने निज नीड़ स्वर्णिम,

क्या हुआ सुख थक गया जो?
दुख-विहग तो शेष है !

क्या हुआ जो साथ छूटा?
साथ मग तो शेष है!

शून्य जग-जीवन-गगन पर,
रात जब आकर उतरती,
कुछ तिमिर वह नील हरता,
कुछ तिमिर यह आँख हरती,

क्या हुआ घन में छिपा शशि है
ज्योति-दृग तो शेष है!

क्या हुआ जो साथ छूटा?
साथ मग तो शेष है!

सत्य क्या है ? कुछ भी नहीं बस
स्वप्न का अंतिम चरण है,
स्वप्न क्या ?-कुछ भी नहीं बस
सत्य की पहली शरण है,

क्या हुआ जो सत्य टूटा?
स्वप्न-जग तो शेष है!

क्या हुआ जो साथ छूटा?
साथ मग तो शेष है!

 

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