क्या छूटा, क्या है आगे…….???-प्राणेन्द्र नाथ मिश्र -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Pranendra Nath Misra

क्या छूटा, क्या है आगे…….???-प्राणेन्द्र नाथ मिश्र -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Pranendra Nath Misra

 

छोटे घर थे, परिवार बड़ा
अब घर हैं बड़े, परिवार नहीं,
हो गयी तीक्ष्ण बुद्धि सबकी
आचार नहीं, व्यवहार नहीं……

औषधि के दाम बढ़े जितना
हो रहा स्वास्थ्य उतना ही कम,
विद्या का स्तर जितना बढ़ा
संस्कृति का निकला उतना दम……

ज्ञानी बन कर सब घूम रहे
पर मेधा, विकसित हुयी नहीं,
बढ़ गए प्रेम, संबंध बढ़े
पर सच्चा प्रेम है कहीं कहीं…….

बढ़ गए बंधु और फ़ालोवर
पर दूर सभी, और हैं अदृश्य
किसे सच्चा मित्र कहा जाये
किसे कहूँ मैं अपना पथ सदस्य…..

मैं पिछली पहर का राही हूँ,
परिवार का देखा वरद हस्त
अब त्याज्य पुत्र और त्यक्त पिता
अब वर्तमान से हो गया त्रस्त….

फिर भी मैं अब भी स्वयं मे हूँ
पर तुम आगे क्या पाओगे ?
इस तरह दूर यदि होते रहे
अनभिज्ञ स्वयं हो जाओगे…….

 

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