कोरोना तुम लौट जाओ-अलका सोनी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Alka Soni,

कोरोना तुम लौट जाओ-अलका सोनी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Alka Soni,

अच्छे नहीं लगते
अब ये
ऊंघते -अनमने से दिन
कैद में हो जैसे जिंदगी
कट रही उमर
पल पल को गिन
बस भी करो
और न सताओ
कोरोना तुम लौट जाओ
पहले से ही थीं
इतनी दूरियां,
उनको और न बढ़ाओ
कोरोना तुम लौट जाओ
शांत मंदिर, न हो रही
उनमें दीया-बाती
दूर हो गए
सब साथी
बंधे हुए हैं
कर्मठ हाथ,
हो गए बोझिल
दिन और रात
बंदी बनी दुनिया
कुछ कर न पाती
भीतर ही भीतर कसमसाती
गुमसुम बचपन को
और न रुलाओ
कोरोना तुम लौट जाओ……

 

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