कोई हादसा होने दो-उमेश दाधीच -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Umesh Dadhich

कोई हादसा होने दो-उमेश दाधीच -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Umesh Dadhich

कतरा-कतरा बिखर जाने दो मुझे, कोई हादसा होने दो
टुटकर बिछड़े तारे के गम मे ठहरी कोई रात सा होने दो

बस एक ख्वाब मेरी आंखो का,एक गम लिये जिंदा है ये
उसके लबो की चुप्पी पर बस उसी की आंख सा रोने दो

कच्चा मकां बना बैठा हूं सुलगती उसकी पलको किनारे
जरा धुआं-धुआं सा उड़ने दो,मुझे बुझी राख सा होने दो

कितना बिन बोले सुना गया,कितना कहते-कहते रह गया
रह गयी एक बात उन होठो पर बस उसी बात सा होने दो ।

 

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