कोई सागर नहीं है-त्रिकाल संध्या-भवानी प्रसाद मिश्र-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Bhawani Prasad Mishra

कोई सागर नहीं है-त्रिकाल संध्या-भवानी प्रसाद मिश्र-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Bhawani Prasad Mishra

 

कोई सागर नहीं है अकेलापन
न वन है
एक मन है अकेलापन
जिसे समझा जा सकता है
आर पार जाया जा सकता है जिसके
दिन में सौ बार

कोई सागर नहीं है
न वन है
बल्कि एक मन है
हमारा तुम्हारा अकेलापन!

 

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