कोई दस्तक नही जमाने से-उमेश दाधीच -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Umesh Dadhich

कोई दस्तक नही जमाने से-उमेश दाधीच -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Umesh Dadhich

मेरी दहलीज़ पे कोई दस्तक नही है जमाने से
लगता है सब रुठ गए है तेरे चले जाने से

कबसे चांद खड़ा है रातो में तन्हा भटका सा
क्यों चला आता नही इन बाहों में मनाने से ।।

बड़ी तल्खी है ख्वाबो की आंखों में आज
लगता है तस्वीर तेरी सरक गयी सिरहाने से ।।

लाख छुपाई है मोहब्बत फूलो सी किताबो में
महक जाती है ग़ज़ल तो तेरे नाम के आने से ।।

रोशन करना था जिन चरागों को घर मेरा
वो आफताब खुश है उसी घर को जलाने से ।।

शिकायत है मेरी मांझी से, लहरों से नही
साहिल को हासिल क्या कश्ती को डुबाने से ।।

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