कोई आखै भूतना को कहै बेताला-शब्द -गुरु नानक देव जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Nanak Dev Ji

कोई आखै भूतना को कहै बेताला-शब्द -गुरु नानक देव जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Nanak Dev Ji

कोई आखै भूतना को कहै बेताला ॥
कोई आखै आदमी नानकु वेचारा ॥१॥
भइआ दिवाना साह का नानकु बउराना ॥
हउ हरि बिनु अवरु न जाना ॥१॥ रहाउ ॥
तउ देवाना जाणीऐ जा भै देवाना होइ ॥
एकी साहिब बाहरा दूजा अवरु न जाणै कोइ ॥२॥
तउ देवाना जाणीऐ जा एका कार कमाइ ॥
हुकमु पछाणै खसम का दूजी अवर सिआणप काइ ॥३॥
तउ देवाना जाणीऐ जा साहिब धरे पिआरु ॥
मंदा जाणै आप कउ अवरु भला संसारु ॥४॥७॥(991)॥

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