कैरेट सोने सा प्रेम-कविता-प्रफुल्ल सिंह “बेचैन कलम” -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Praful Singh “Bechain Kalam”

कैरेट सोने सा प्रेम-कविता-प्रफुल्ल सिंह “बेचैन कलम” -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Praful Singh “Bechain Kalam”

 

जिन शब्दों में विदा कहा गया
वे विदाई के शब्द नहीं थे:
‘अपना ख्याल रखना’!
जिन शब्दों में प्रेम प्रस्तावित किया गया
वे प्रेम के शब्द नहीं थे
उनमें निहित था साथ का स्वार्थ!

पहली बार मिलन के बाद
विदा के समय शब्दहीन आंसू शुद्धतम प्रेम थे
जिन शब्दों में अंतिम विदा कहा गया
वे प्रेम के सिवा कुछ नहीं थे!
अंतिम विदा का चुम्बन
24 कैरेट सोने सा प्रेम होता है,
जिसमें गहने नहीं बन सकते

भाषा अभी ठीक से सीखी ही कहाँ मनुष्य ने..! !

 

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