कुछ युग्म-अमीरी रेखा_कविता संग्रह-कुमार अंबुज-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kumar Ambuj

कुछ युग्म-अमीरी रेखा_कविता संग्रह-कुमार अंबुज-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kumar Ambuj

 

[यों ही]

ताजमहल और निरंकुशता
बुखार और गिलहरी
दूब और कार्यालय की मेज़
वासना और फटी हुई कमीज़
ऊब और कंप्यूटर
पतझड़ और किशोरावस्था
दो स्वर्ण पदक
और तीन आत्महत्याएँ।

 

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