कुछ ना कहो-ग़ज़लें व फ़िल्मी गीत-जावेद अख़्तर-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Javed Akhtar

कुछ ना कहो-ग़ज़लें व फ़िल्मी गीत-जावेद अख़्तर-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Javed Akhtar

कुछ ना कहो, कुछ भी ना कहो
क्या कहना है, क्या सुनना है
मुझको पता है, तुमको पता है
समय का ये पल थम सा गया है
और इस पल में कोई नहीं है
बस एक मैं हूं, बस एक तुम हो

कितने गहरे हलके, शाम के रंग है छलके
परबत से यूं उतरे बादल, जैसे आंचल ढलके
और इस पल में…

सुलगी सुलगी सांसें, बहकी बहकी धड़कन
महके महके शाम के साए, पिघले पिघले तनमन
और इस पल में…

कुछ ना कहो, कुछ भी ना कहो
क्या कहना है, क्या सुनना है
मुझको पता है, तुमको पता है
समय का ये पल थम सा गया है
और इस पल में कोई नहीं है
बस एक मैं हूं, बस एक तुम हो

(1942 अ लव स्टोरी)

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