कुछ दिन से इंतज़ारे-सवाले-दिगर में है-नक़्शे फ़रियादी-फ़ैज़ अहमद फ़ैज़-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Faiz Ahmed Faiz

कुछ दिन से इंतज़ारे-सवाले-दिगर में है-नक़्शे फ़रियादी-फ़ैज़ अहमद फ़ैज़-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Faiz Ahmed Faiz

कुछ दिन से इंतज़ारे-सवाले-दिगर में है
वह मुज़्महिल हया जो किसी की नज़र में है

सीखी यहीं मिरे दिले-काफ़िर ने बंदगी
रब्बे-करीम है तो तिरी रहगुज़र में है

माज़ी में जो मज़ा मिरी शामो-सहर में था
अब वह फ़क़त तसव्वुरे-शामो-सहर में है

क्या जाने किसको किससे है अब दाद की तलब
वह ग़म जो मेरे दिल में है तेरी नज़र में है

 

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