कुछ और दीखे ना-वंशीवट सूना है -गोपालदास नीरज-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gopal Das Neeraj

कुछ और दीखे ना-वंशीवट सूना है -गोपालदास नीरज-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gopal Das Neeraj

अब तुम्हें छोड़ और कुछ दीखे ना !

दृश्य सब अदृश्य हुए
शब्द सकल मौन
खाट ही नहीं है जब
कसे कहाँ दौन
हाँ किसके हिय के जब अपने ही जीके ना ।
अब तुम्हें छोड़ और कुछ दीखे ना ।।

साँस कीर्तन है
धड़कन हर थाप
सत्ता समाधि बनी
जीवन सब जाप
हो जाओ प्रिय तुम भी तनिक हम सरीखे ना।
अब तुम्हें छोड़ और कुछ दीखे ना ।।

झर-झर नित आँख झरे
गले अंग अंग
इस पर ये कौतुक
तुम हर दम हो संग
साथ छुटे कैसे जब आयु सौत बीते ना।
अब तुम्हें छोड़ और कुछ दीखे ना ।।

Leave a Reply