कुछ अश‍आर-राम प्रसाद बिस्मिल -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Ram Prasad Bismil

कुछ अश‍आर-राम प्रसाद बिस्मिल -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Ram Prasad Bismil

इलाही ख़ैर वो हरदम नई बेदाद करते हैं
हमें तोहमत लगाते हैं जो हम फरियाद करते हैं

ये कह कहकर बसर की उम्र हमने क़ैदे उल्फत में
वो अब आज़ाद करते हैं वो अब आज़ाद करते हैं

सितम ऐसा नहीँ देखा जफ़ा ऐसी नहीँ देखी
वो चुप रहने को कहते हैं जो हम फरियाद करते हैं

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