कीजै ऐसी कथा मत, निष्फल कथनी जोय-ज्ञान-वैराग्य कुण्डलियाँ-गिरिधर कविराय-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Giridhar Kavirai 

कीजै ऐसी कथा मत, निष्फल कथनी जोय-ज्ञान-वैराग्य कुण्डलियाँ-गिरिधर कविराय-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Giridhar Kavirai

कीजै ऐसी कथा मत, निष्फल कथनी जोय।
सिद्धि ना जिसमें अर्थ की, नहिं परमारथ होय॥
नहिं परमारथ होय, वार्ता सो सब तजिए ।
राम कृष्ण नारायण गोविंद हरि हरि भजिए ॥
कह गिरिधर कविराय, सुधा अनुभव रस पीजै ।
आतम-अनुसंधान होय सो चरचा कीजै॥

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