किसने मुझे कहा, पतंग हूं मैं-अनुपमा श्रीवास्तव ‘अनुश्री’-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita,

किसने मुझे कहा, पतंग हूं मैं-अनुपमा श्रीवास्तव ‘अनुश्री’-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita,

किसने मुझे कहा, पतंग हूं मैं !
अपनी ही मस्ती में, मलंग हूं मैं।

करती हूं कभी सात समंदर पार
तो कभी एवरेस्ट चढ़ती
अब तो अंतरिक्ष पर भी
ध्वजा फहरा दी है अपने नाम की
सचमुच हौंसलों में बुलंद हूं मैं
किसने मुझे कहा, पतंग हूं मैं !

अष्ट भुजाएं हैं मेरी
करती हूं संभाल- देखभाल
अपनों की, ज़िम्मेदारियों की
जब बाहर निकलती हूं अच्छी
ख़बर लेती हूँ दुश्वारियों की
प्रतिभा, प्रेम, धैर्य, साहस का
खिला इंद्रधनुषी रंग हूं मैं
किसने मुझे कहा, पतंग हूं मैं !

हां, पतंग पसंद बहुत हैं मुझे
रंग बिरंगी प्यारी प्यारी
भर जाती है मुझ में भी
जोश ए जुनूं, सपनों को
सच करने की तैयारी
क़ायनात का मधुर मृदंग हूं मैं
किसने मुझे कहा, पतंग हूं मैं !

ग़र मान भी लो पतंग मुझको
तो भी यह पक्का कर लो
अपनी डोर कभी दी नहीं तुमको
डोर भी मेरी और उड़ान भी मेरी
अपने फ़ैसले खु़द करती, दबंग हूं मैं
किसने मुझे कहा, पतंग हूं मैं !

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