किन्ने मूढ़ ने पानी नदी पहाड़ी दे- पंजाबी कविता( अनुवाद)-रसूल हमज़ातोव-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Rasul Gamzatov(Rasool Hamzatov) 

किन्ने मूढ़ ने पानी नदी पहाड़ी दे- पंजाबी कविता( अनुवाद)-रसूल हमज़ातोव-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Rasul Gamzatov(Rasool Hamzatov)

किन्ने मूढ़ ने पानी नदी पहाड़ी दे
नमीयों बिनां चटानां एथे तिड़कदियां,
क्युं एने काहले उधर वहन्दे जांदे ओ,
बिनां तुहाडे जित्थे लहरां मचलदियां ?
बड़ी मुसीबत हैं तूं मेरे दिल पागल
प्यारे ने जो, प्यार उन्हां नूं नहीं करदा,
खिच्च्या जानैं तूं तां उधर ही सदा
जिधर कोई नैन ना तेरी राह तक्कदा ।

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