कितने दिन बीत गए-यों गाया है हमने तुमको -कुमार विश्वास-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kumar Vishwas 

कितने दिन बीत गए-यों गाया है हमने तुमको -कुमार विश्वास-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kumar Vishwas

कितने दिन बीत गए,
देह की नदी में
नहाये हुए
सपने की फिसलन के डर जैसा,
दीप बुझी देहरी के घर जैसा,
जलती लौ नेह चुके दीपक-सा,
दिन डूबा वंशी के स्वर जैसा,

कितने सुर रीत गए,
अंतर का गीत कोई
गाए हुए
कितने दिन बीत गए।

कुछ ऐसा पाना जो जग छूटे
मंथन वो जिससे झरना फूटे
बिन बांधे बंधने का वो कौशल
जो बांधे तो हर बंधन टूटे
कितने सुख जीत गए
पोर पोर पीड़ा
कमाए हुए
कितने दिन बीत गए।

Leave a Reply