किउ मरै मंदा किउ जीवै जुगति-सलोक-गुरु नानक देव जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Nanak Dev Ji

किउ मरै मंदा किउ जीवै जुगति-सलोक-गुरु नानक देव जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Nanak Dev Ji

किउ मरै मंदा किउ जीवै जुगति ॥
कंन पड़ाइ किआ खाजै भुगति ॥
आसति नासति एको नाउ ॥
कउणु सु अखरु जितु रहै हिआउ ॥
धूप छाव जे सम करि सहै ॥
ता नानकु आखै गुरु को कहै ॥
छिअ वरतारे वरतहि पूत ॥
ना संसारी ना अउधूत ॥
निरंकारि जो रहै समाइ ॥
काहे भीखिआ मंगणि जाइ ॥७॥(953)॥

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