कारे कजरारे सटकारे घुँघवारे प्यारे-घासीराम-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Ghasiram

कारे कजरारे सटकारे घुँघवारे प्यारे-घासीराम-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Ghasiram

कारे कजरारे सटकारे घुँघवारे प्यारे,
मणि फणि वारे भोर फबन लौँ ऊटे हैँ ।

बासे हैँ फुलेल ते नरम मखतूल ऎसे,
दीरघ दराज ब्याल ब्यालिन लौं झूठे हैँ ।

घासीराम चारु चौंर जमुना सिवार बोरोँ,
ऎसी स्याम्ताई पै गगन घन लूटे हैँ ।

छाई जैहै तिमिर बिहाय रैनि आय जैहै,
झारि बाँध अजहूँ सभाँर वार छूटे हैँ ।

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