कातरता-कविता-नरेश मेहता-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Naresh Mehta 

कातरता-कविता-नरेश मेहता-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Naresh Mehta

 

जब भी कहीं किसी वृक्ष को
पूर्णता देता
वर्णप्राप्त फूल खिला होता है
उस वृक्ष की वनस्पति
प्रियंवदा नारी-सी
सिर ढँकती आनत नेत्र हो जाती है
और मुझे लगता है—
मैं ऐसी
मानुषी पूर्णता को वहन करता वृक्ष क्यों न हुआ?
मुझे भी मिल जाती।
वनस्पतियों वाले गुलाल-व्यक्तित्व की कृतार्थता।

क्यों न हुआ?
मानुषी काव्य-फूल की
ऐसी पूर्णता को वहन करता वृक्ष
क्यों न हुआ?
क्यों न हुआ?

 

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