कहीं दूर लेकर चल यारा।-राही चल : अनिल मिश्र प्रहरी (Anil Mishra Prahari)| Hindi Poem | Hindi Kavita,

कहीं दूर लेकर चल यारा।-राही चल : अनिल मिश्र प्रहरी (Anil Mishra Prahari)| Hindi Poem | Hindi Kavita,

ले चल मुझको दूर गाँव में
बट, पीपल की घनी छाँव में,
बागों में नित कोयल कूके
शीतल पवन बहे तन छूके।
सरिता की हो निर्मल – धारा
कहीं दूर लेकर चल यारा।

जहाँ धरा की सुषमा न्यारी
फूल खिले हों क्यारी – क्यारी,
मस्ती में हों भ्रमर झूमते
कलियों को हो मग्न चूमते।
मंजर लगता हो अति प्यारा
कहीं दूर लेकर चल यारा।

रजनी का हो शीतल अंचल
शबनम की कुछ बूँदें चंचल,
शुभ्र -चाँदनी का डेरा हो
हर दिश सौरभ का घेरा हो।
बरसाता अमृत ध्रुव – तारा
कहीं दूर लेकर चल यारा।

 

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