कहा सुआन कउ सिम्रिति सुनाए-शब्द-कबीर जी -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kabir Ji

कहा सुआन कउ सिम्रिति सुनाए-शब्द-कबीर जी -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kabir Ji

कहा सुआन कउ सिम्रिति सुनाए ॥
कहा साकत पहि हरि गुन गाए ॥१॥
राम राम राम रमे रमि रहीऐ ॥
साकत सिउ भूलि नही कहीऐ ॥१॥ रहाउ ॥
कऊआ कहा कपूर चराए ॥
कह बिसीअर कउ दूधु पीआए ॥२॥
सतसंगति मिलि बिबेक बुधि होई ॥
पारसु परसि लोहा कंचनु सोई ॥३॥
साकतु सुआनु सभु करे कराइआ ॥
जो धुरि लिखिआ सु करम कमाइआ ॥४॥
अम्रितु लै लै नीमु सिंचाई ॥
कहत कबीर उआ को सहजु न जाई ॥५॥७॥२०॥481॥

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