कहाँ हुआ?-देखना एक दिन-नरेश मेहता-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Naresh Mehta

कहाँ हुआ?-देखना एक दिन-नरेश मेहता-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Naresh Mehta

 

लिखा तो गया
पर, कहना कहाँ हुआ?

किससे कहते–
तुम यदि होते
राह भले ही तपती होती
पर बातों के द्रुमदल-मृगजल कुछ तो होते
हाँ, नदियाँ थी दिखीं
मिलीं भी
पर, बहना कहाँ हुआ?

किसे दिखाते–
कितने पैबन्दोंवाली थी अपनी कथरी
राग और वैराग्य बीच हम
होते गये विवश भरथरी
उतर गया भूषा सा जीवन
मन से, तन से
चलो बटोही?
इस सराय में रहना कहाँ हुआ?

 

Leave a Reply