कहाँ से लाते हो अल्फाज-कविता -दीपक सिंह-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Deepak Singh

कहाँ से लाते हो अल्फाज-कविता -दीपक सिंह-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Deepak Singh

 

कहाँ से लाते हो अल्फाज,
हे राजनीति के सरताज ।

भारत माँ के विरोधियों के,
क्यों शीश नहीं काटते,
जो देश को चला रहे
अंदर के गुनहगार
कहाँ से लाते हो अल्फाज,
हे राजनीति के सरताज ।

नीति चले दिमाग से,
पर शासन चले तलवार से
जो हर वक्त दंश लगा रहे
तैयार बैठे गुनहगार
कहाँ से लाते हो अल्फाज,
हे राजनीति के सरताज ।

आकर्षण बोली धार से
वक्त पड़े तौबा कर ली
भ्रष्ट कुचरित्र कुपात्र,
लोगों की निन्दा कर ली ।
फंदे ना पड़े इनके गले में,
ये कैसी सरकार।
कहाँ से लाते हो अल्फाज,
हे राजनीति के सरताज ।

कार्य एवं स्वच्छ चरित्र,
अनुच्छेद उत्तरदायी हो ।
सत्य एवं संविधान के
प्रति उत्तरदायी हो ।
विवेकानन्द की वाणी को,
क्यों न बनाते नीतिआधार ।
कहाँ से लाते हो अल्फाज,
हे राजनीति के सरताज ।

 

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