कहने लगा हुज़ूर का -शहीदान-ए-वफ़ा-अल्लाह यार ख़ां -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Allah Yar Khan Jogi ,

कहने लगा हुज़ूर का -शहीदान-ए-वफ़ा-अल्लाह यार ख़ां -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Allah Yar Khan Jogi ,

कहने लगा हुज़ूर का रुतबा बुलन्द हो ।
नानक की शान दसवें गुरू में दुचन्द हो ।
हादी हो इक ज़माने के तुम दरदमन्द हो ।
कीजे मुआफ़ बात अगर न पसन्द हो ।
भेजा है मुझ को नाज़िम-ए-सरहन्द ने यहां ।
फरमान-ए-शाह-ए-दिल्ली के पाबन्द ने यहां ।

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