कवि हृदय-कविता-प्रफुल्ल सिंह “बेचैन कलम” -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Praful Singh “Bechain Kalam”

कवि हृदय-कविता-प्रफुल्ल सिंह “बेचैन कलम” -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Praful Singh “Bechain Kalam”

 

जीवन की हारों से व्यथित, हृदय कवि बन जाता है
प्रेम-सुधा का चिरअभिलाषित, हृदय कवि बन जाता है
प्रतिफल में जब मिले उपेक्षा, हृदय समर्पित करने पर
भग्नस्वप्न से होकर विचलित, हृदय कवि बन जाता है..!!

 

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