कवि का भाग- ऐसा कोई घर आपने देखा है अज्ञेय- सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन “अज्ञेय”-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Sachchidananda Hirananda Vatsyayan Agyeya,

कवि का भाग- ऐसा कोई घर आपने देखा है अज्ञेय- सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन “अज्ञेय”-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Sachchidananda Hirananda Vatsyayan Agyeya,

कवि का है भाग यही
आग से आग तक
जलना गलना
गलाना मन्दिर जिसका भी हो
प्रतिमा बनाना-बैठाना नहीं-
प्रतिमा के प्राणों को सुलगाना।

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