कविता -हरदीप सबरवाल -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Hardeep Sabharwal Part 1

कविता -हरदीप सबरवाल -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Hardeep Sabharwal Part 1

 

समानार्थक

अतीत को बोझ तले दबा एक पल,
भविष्य की और तकता,
बैठ जाता है वर्तमान की किसी धारा के किनारे,
चिल्ला दूं!
या चुप रहुं!
ये फ़ैसला अभी नहीं किया,
चिल्लाहट में एक चुप्पी है,
और चुप्पी में एक चिल्लाहट,
आसमान का रंग भी समुद्र सा ही नीला है,
डूबना ज़्यादा बेहतर होता है या उड़ान भरना,
ना जाने कैसा उन्माद है,
ना जाने कैसा अवसाद,
उन्माद में भी अवसाद है,
अवसाद में भी उन्माद.
जैसे जीवन में ही मृत्यू हो
और मृत्यू में ही जीवन.

 

अपाहिज

हमारे हाथ काम मांगते है
वो दो रूपये किलो चावल देते है,
हमारी खेत अच्छे बीज, नई तकनीक मांगते है ,
वो कर्जमाफी की घोषणा करते है
हमारे बच्चे शिक्षा में गुणवत्ता मांगते है
वो मुफ्त स्मार्टफोन का वादा करते है,
हमारे घरो में टंगे बल्ब जगमगाना चाहते है
वो मुफ्त बिजली का झुनझुना देते है
हमारे गांव की गलीयां सड़क मांगती है
वो हमें धर्म की पगडंडियो पर हांकते है
हम सीधे से शब्दो में सुनना चाहते है
वो हमें किसी वर्गपहेली में उलझा देते है
हम जब भी दौड़ में शामिल होना चाहते है,
वो हमें वैसाखीयां थमा देते है.

 

अनुत्तीर्ण प्रेम

बेमायने होगा
एक लड़के से तबदील हुए पूरुष से पूछना,
कि क्या वह प्रेम में पड़ा किसी लड़की के,
और फिर
उसकी प्रेम कहानियों की दफन हुई दीवार में से,
खोदकर तलाशना पहले,
पहले के बाद दूसरे, तीसरे या चौथे प्रेम की दास्तान को,
वैसे ही
जैसे किसी प्रश्न पुस्तिका में दिए क्रमवार प्रश्नों के उत्तर खोजें जाते हैं,
और प्रेम को बना देना किसी सांख्यिकी का खेल,
उससे भी बुरी बात है,
अलग-अलग समय में रही उसकी प्रेमिकाओं में से किसी,
एक में तलाशना मोनालिसा की मुस्कान को,
या फिर दूसरी की आंख में खोजना मृग की चपलता, और किसी और के,
जिस्म के उभारों और गहराइयों को जानने की इच्छा रखना,
और रख देना प्रेम को किसी आर्ट गैलरी में,
किसी चित्रकार का चित्र बनाकर,
या मूर्तिकार की बनाई आकर्षक मूर्ति,
हास्यास्पद है,
एक तरफा, दो तरफा, त्रिकोणीय या चतुर्भुज प्रेम की बात
ये प्रेम है या कोई ज्यामिति की प्रमेय,
और सबसे बड़ी बेवकूफी की बात,
न्यायाधीश बन
किसी भी प्रेम कहानी को हार और जीत की कसौटी पर तोलना,
प्रेम पाने के लिए नहीं होता,
और प्रेम में खोना कुछ होता नहीं,
फिर भी अगर कभी,
जानना ही चाहो
किसी की प्रेम कहानी में से कुछ,
तो पूछ लेना कि अचानक अगर,
चाहे वर्षों के अंतराल पर ही,
सामने आ जाए वह शख्स जिससे कभी प्रेम था,
जीवन की विकट परिस्थितियों से घिरा,
क्या अब भी इच्छा पैदा हुई
अपना सर्वस्व लुटा कर भी उसे मुश्किल से बाहर निकालने की
यदि जवाब ना हो तो समझ जाइएगा,
वह एक अनुत्तीर्ण प्रेम भर था,
जानना चाहते हो क्यों
क्योंकि इस पूरी कायनात में सिर्फ,
एक प्रेम में पागल हुआ व्यक्ति ही,
अपना सर्वस्व लुटाने का मादा रखता है….

 

जीवाश्म

कुरेदना कभी
मेरी जिस्म की तहो को,
शायद तुम देख पाओ
कहीं मेरी मांसपेशियो के नीचे
प्यार की विलुप्त होती यादों के चिन्ह,
आदिम युग के पहले के युग में,
प्यार भी एक प्रजाति होती होगी,
पर आजकल मौजूद नहीं है,
मेरी सांस की गहरी वादियों में,
किसी पाषाण तूफान सी,
जहां तुम अभी भी गंध महसूस
कर सकते हो
उन गुलाबों की खुशबू की,
खिलने से पहले सूखने वाले
और कहीं मेरी त्वचा की झुर्रियों के
विभाजित होते उत्तको के बीच
हमारे सपनों की उस चादर की छाप
अभी भी रंग बिखेरती है कई,
मेरे दिल में कहीं गहराई से जांचें,
और तुम्हे मिलेंगे, कुछ अप्रभावी और प्रभावशाली महत्वाकांक्षाऐं,
यहां और वहां नक्काशी में,
कौन कहता है कि जीवाश्म केवल चट्टानों और बर्फ की ठंडी परतों में पाए जाते हैं?
मेरे पूरे शरीर और दिल में तुम देख सकते हो
मेरे प्यार, महत्वाकांक्षाओं और मेरे सभी यादों के जीवाश्म…..

 

जंगल

जानवर सिर्फ जंगलो में ही नही होते,
घात लगाऐ,
किसी पत्थर की ओट में,
या पत्तो के पीछे छिप कर,
गर्दन पर हमला करते,
एक बार में ही काम-तमाम,
नोचते मांस को,
जानवर इंसानो के अंदर भी होते है,
उसकी मुस्कुराहट के पीछे,
उसकी मीठी जबान के नीचे,
उसके चेहरे के आवरण में घात लगाऐ,
जंगल के जानवर
जब क्षुधा मिटा लेते है
कुदरत की भोजन-क्षृंखला का हिस्सा होकर
तृप्त से,
शांतचित हो जाते है,
पर इंसान के अंदर बैठे जानवर की
भूख नहीं मिटती कभी,
हमेशा अतृप्त
नोचने को तैयार ,
जंगल सिर्फ बाहर ही नहीं होते…

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