कविता-युवराज हरितवाल -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Yuvraj Haritwal Part 2

कविता-युवराज हरितवाल -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Yuvraj Haritwal Part 2

पूरी जिंदगी गुजर जाती है

पूरी जिंदगी गुजर जाती है,
रिश्ते निभाने के लिए।
किंतु गलतफहमियाँ काफ़ी होती है,
रिश्ते तुड़वाने के लिए।

कोशिशें लाख करनी पड़ती है,
कामयाबी पाने के लिए।
किंतु चंद गलतियाँ बहुत होती है,
रास्ते पर आने के लिए।

इसही तरह जीवन बीत जाता है,
पैसा और नाम कमाने के लिए।
‘युवराज’ अंत में समय भी नहीं मिल
पाता परिवार के साथ बिताने के लिए।

फिर क्यों वृद्धाश्रम बने

दादी दादा बिन पिता ना होए
माता पिता बिन तुम।
फिर क्यों वृद्धाश्रम बने उनके लिये,
जिनकी वजह से हुए तुम।

दादी दादा अगर वृद्धाश्रम जाये,
तो अगले हो माता पिता तुम।
क्योंकि बच्चे तो बड़ो से सीखे,
और यही सीखा रहे हो उन्हें तुम।

माता पिता ने सींचा जिसको
वही वृक्ष हो तुम
क्या इस उम्मीद मे सींचा
तुमको की,
एक दिन वृद्धाश्रम उन्हें दिखाओ तुम।

याद करो बचपन तुम्हारा,
जब लाचार थे तुम।
शहजादो की तरह तब पाला तुमको
यह बात ना भूलो तुम।

आज ऐशो आराम की जिंदगी,
जो जी रहे हो तुम।
माता पिता नींव है इसकी
बादशाहो की तरह उन्हें रखो तुम।

ख़ुदग़र्ज़ ना बनो इतने भी की
एक दिन पछताओ तुम।
‘युवराज’ की सुनो प्रार्थना
उन माता पिता को
घर वापस ले आओ तुम।
घर वापस ले आओ तुम।

गलतियाँ तो जीवन में

गलतियाँ तो जीवन में,
हम सबसे होती है।
पर गलतियाँ ही तो, आगे बढ़ने कि सीढ़िया होती है।

खूबियों में भी जरूर,
कुछ कमियां होती है।
क्योंकि परिपूर्णता, किसी चीज़ में न होती है।

और कमियां भी कहाँ,
गुणहीन ! होती है।
क्योंकि हर कमी में, छुपी कुछ सीख होती है।

मनुष्य चाहे तो संभव,
हर चीज होती है।
क्योंकि ‘युवराज’, जहाँ चाह वहाँ राह होती है।

गरीब दुखी गरीबी से

गरीब दुखी गरीबी से,
तृष्णा वश धनवान।
यहाँ सुखी रहते वहीं, जो लेते हरि का नाम।

नास्तिक यहाँ कोई नहीं,
आस्तिक हर इंसान।
मानो या न मानो, सबके मन में है भगवान।

जीवन रूपी गाड़ी के,
चालक है भगवान।
उनकी इच्छा से ही होते, जग में सारे काम।

हमारी रक्षा के लिए,
ततपर है भगवान।
‘युवराज’ मन से पुकारो, सुन लेंगे भगवान।

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