कविता-तेरे बाझों इह दुनियां है, ज्युं कोई गुफ़ा हनेरी ।- पंजाबी कविता( अनुवाद)-रसूल हमज़ातोव-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Rasul Gamzatov(Rasool Hamzatov) 

कविता-तेरे बाझों इह दुनियां है, ज्युं कोई गुफ़ा हनेरी ।- पंजाबी कविता( अनुवाद)-रसूल हमज़ातोव-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Rasul Gamzatov(Rasool Hamzatov)

तेरे बाझों इह दुनियां है, ज्युं कोई गुफ़ा हनेरी ।
चानन जिसदी समझ ना आए, सूरज चीज़ पराई ।
जां आकाश जित्थे कोई तारा, पाए कदे ना फेरी ।
जां फिर प्यार जिन्हे गलवकड़ी, ना कोई चुंमन हंढाई ।

तेरे बाझों इह दुनियां, ज्युं सागर बिनां नीलत्तन
ठंडा यक्ख, ना जेहड़ा आपनी अज़ली चमक दिखावे ।
जां फिर बाग़ ना जिथे उग्गे कोई फुल्ल कोई घाह दा तिण
ना कोई बिंडा राग अलापे, ना कोई बुलबुल गावे ।

तेरे बिन रुक्ख सदा खड़ोते, रुंड-मरुंड, उदास,
सदा नवम्बर-कदी ना आए हुनाल, स्याल, बहार ।
लोक तेरे बिन निरधन, वहशी, जापन घोर निराश ।
ते तेरे बिन सक्खना होवे गीतां दा संसार ।

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