कविताएँ-गुरू गोबिन्द सिंह जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Gobind Singh Ji 7

कविताएँ-गुरू गोबिन्द सिंह जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Gobind Singh Ji 7

छीर कैसी छीरावध छाछ

छीर कैसी छीरावध छाछ कैसी छ्त्रानेर छपाकर कैसी छबि कालिंद्र के कूल कै ॥
हंसनी सी सीहारूम हीरा सी हुसैनाबाद गंगा कैसी धार चली सात सिंध रूल कै ॥
पारा सी पलाऊगढ रूपा कैसी रामपुर सोरा सी सुरंगाबाद नीकै रही झूल कै ॥
च्मपा सी चंदेरी कोट चांदनी सी चांदागड़ि्ह कीरति तिहारी रही मालती सी फूल कै ॥१२॥२६४॥

फटक सी कैलास कमांऊगड़्ह

फटक सी कैलास कमांऊगड़्ह कांसीपुर सीसा सी सुरंगाबादि नीकै सोहीअतु है ॥
हिमा सी हिमालै हर, हार सी ह्लबानेर हंस कैसी हाजीपुर देखे मोहीअतु है ॥
चंदन सी च्मपावती चंद्रमा सी चंद्रागिर चांदनी सी चांदगड़्ह जौन जोहीअतु है ॥
गंगा सम गंग धारि बकान सी बलिंदावाद कीरित तिहारी की उजिआरी सोहीअतु है ॥१३॥२६५॥

फरांसी फिरंगी फरांसीस के दुरंगी

फरांसी फिरंगी फरांसीस के दुरंगी मकरान के म्रिदंगी तेरे गीत गाईअतु है ॥
भखरी कंधारी गोर गखरी गरदेजा चारी पउन के अहारी तेरे नामु धिआईअतु है ॥
पूरब पलाऊं काम रूप औ कमाऊं सरब ठउर मै बिराजै जहां जहां जाईअतु है ॥
पूरन परतापी जंत्र मंत्र ते अतापी नाथ कीरित तिहारी को न पार पाईअतु है ॥१४॥२६६॥

सुन कै सद्दु माही दा मेहीं

सुन कै सद्दु माही दा मेहीं, पानी घाहु मुतो ने ॥
किसै नालि न रलिया काई, केहो शउक पयो ने ॥
गया फिराकु मिल्या मित माही, तांही शुकर कीतो ने ॥

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