कल आई कुत्ते मुही खाज होआ मुरदार गुसाई ॥-बाबे नानक देव जी दी वार-भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji 

कल आई कुत्ते मुही खाज होआ मुरदार गुसाई ॥-बाबे नानक देव जी दी वार-भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji

कल आई कुत्ते मुही खाज होआ मुरदार गुसाई ॥
राजे पाप कमांवदे उलटी वाड़ खेत कउ खाई ॥
परजा अंधी ग्यान बिन कूड़ कुसत मुखहु अलाई ॥
चेले साज वजायन्दे नच्चन गुरू बहुत बिध भाई ॥
सेवक बैठन घरां विच गुर उठ घरीं तिनाड़े जाई ॥
काज़ी होए रिशवती वढ्ढी लैके हक्क गवाई ॥
इसत्री पुरखा दाम हित भावें आइ किथाऊं जाई ॥
वरत्या पाप सभस जग मांही ॥30॥

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