कली-फूल पत्ते अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Ayodhya Singh Upadhyay Hariaudh,

 कली-फूल पत्ते अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Ayodhya Singh Upadhyay Hariaudh,

बच सकेगा नहीं भँवर से रस।
आ महक को हवा उड़ा लेगी।
पास पहुँच बनी ठनी तितली।
पंखड़ी को मसल दगा देगी।1।

छीन ले जायगी किरन छल से।
ओस की बूँद से मिला मोती।
फूलने का न नाम भी लेती।
जो कली भेद जानती होती।2।

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