कलि होई कुते मुही खाजु होआ मुरदारु-सलोक-गुरु नानक देव जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Nanak Dev Ji

कलि होई कुते मुही खाजु होआ मुरदारु-सलोक-गुरु नानक देव जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Nanak Dev Ji

कलि होई कुते मुही खाजु होआ मुरदारु ॥
कूड़ु बोलि बोलि भउकणा चूका धरमु बीचारु ॥
जिन जीवंदिआ पति नही मुइआ मंदी सोइ ॥
लिखिआ होवै नानका करता करे सु होइ ॥१॥(1242)॥

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